ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण

माँ लक्ष्मी मंत्र

धन एवं ऐश्वर्य की देवी

229 मंत्र

मंत्र

ॐ संसारार्णवतारिण्यै नमः

मंत्र

ॐ अनुग्रहायै नमः

मंत्र

ॐ क्षमायै नमः

मंत्र

ॐ अनघायै नमः

मंत्र

ॐ अशोकायै नमः

मंत्र

ॐ लोकशोकविनाशिन्यै नमः

मंत्र

ॐ करुणायै नमः

मंत्र

ॐ प्रसादाभिमुख्यै नमः

मंत्र

ॐ शिवकर्यै नमः

मंत्र

ॐ विमलायै नमः

मंत्र

ॐ दारिद्र्यनाशिन्यै नमः

मंत्र

ॐ शान्तायै नमः

मंत्र

ॐ दारिद्र्यध्वंसिन्यै नमः

मंत्र

ॐ सर्वोपद्रववारिण्यै नमः

मंत्र

ॐ जनरञ्जिन्यै नमः

मंत्र

ॐ सुरभ्यै नमः

मंत्र

ॐ सुप्रसन्नायै नमः

मंत्र

ॐ नवदुर्गायै नमः

मंत्र

ॐ महाकाल्यै नमः

मंत्र

ॐ रमायै नमः

मंत्र

ॐ विष्णुवक्षःस्थलस्थितायै नमः

मंत्र

ॐ नारायणसमाश्रितायै नमः

मंत्र

ॐ नन्दिन्यै नमः

मंत्र

ॐ महाकन्यायै नमः

मंत्र

ॐ सरस्वत्यै नमः

मंत्र

ॐ कात्यायन्यै नमः

मंत्र

ॐ कपिलायै नमः

मंत्र

ॐ ब्रह्मविष्णुशिवात्मिकायै नमः

मंत्र

ॐ मङ्गलायै नमः

मंत्र

ॐ विभावर्यै नमः

मंत्र

ॐ पद्मोद्भवायै नमः

मंत्र

ॐ पद्ममालाधरायै नमः

मंत्र

ॐ पद्मालयायै नमः

मंत्र

ॐ पद्ममुख्यै नमः

मंत्र

ॐ पद्मनाभप्रियायै नमः

मंत्र

ॐ पद्मिन्यै नमः

मंत्र

ॐ पद्मगन्धिन्यै नमः

मंत्र

ॐ वसुधारिण्यै नमः

मंत्र

ॐ धनधान्यकर्यै नमः

मंत्र

ॐ सिद्धयै नमः

मंत्र

ॐ नृपवेश्मगतानन्दायै नमः

मंत्र

ॐ वरलक्ष्म्यै नमः

मंत्र

ॐ वसुप्रदायै नमः

मंत्र

ॐ हिरण्यप्राकारायै नमः

मंत्र

ॐ देव्यै नमः

मंत्र

ॐ सर्वैश्वर्यप्रदायिन्यै नमः

मंत्र

ॐ विभूत्यै नमः

मंत्र

ॐ हिरण्मय्यै नमः

मंत्र

ॐ नित्यपुष्टायै नमः

मंत्र

ॐ दीप्तायै नमः

मंत्र

ॐ प्रभायै नमः

मंत्र

ॐ चन्द्रवदनायै नमः

मंत्र

ॐ चन्द्रसहोदर्यै नमः

मंत्र

ॐ इन्दिरायै नमः

मंत्र

ॐ भास्कर्यै नमः

मंत्र

ॐ वसुन्धरायै नमः

मंत्र

ॐ हेममालिन्यै नमः

मंत्र

ॐ ज्योतिष्मत्यै नमः

मंत्र

ॐ सर्वमन्त्रफलप्रदायै नमः

मंत्र

ॐ श्रियै नमः

मंत्र

ॐ बिल्वनिलयायै नमः

मंत्र

ॐ यशस्विन्यै नमः

मंत्र

ॐ उदाराङ्गायै नमः

मंत्र

ॐ हरिण्यै नमः

मंत्र

ॐ स्त्रैणसौम्यायै नमः

मंत्र

ॐ शुभप्रदायै नमः

मंत्र

ॐ शुभायै नमः

मंत्र

ॐ समुद्रतनयायै नमः

मंत्र

ॐ जयायै नमः

मंत्र

ॐ विष्णुपत्न्यै नमः

मंत्र

ॐ प्रसन्नाक्ष्यै नमः

मंत्र

ॐ महालक्ष्म्यै नमः

मंत्र

ॐ महामायायै नमः

मंत्र

ॐ शुक्लमाल्याम्बरायै नमः

मंत्र

ॐ महाविद्यायै नमः

मंत्र

ॐ गुह्यविद्यायै नमः

मंत्र

ॐ अमोघायै नमः

मंत्र

ॐ ब्रह्माण्डमोहिन्यै नमः

मंत्र

ॐ त्रैलोक्यकुटुम्बिन्यै नमः

मंत्र

ॐ रत्नगर्भायै नमः

मंत्र

ॐ दयासुदृष्ट्यै नमः

मंत्र

ॐ सुवर्णदृष्ट्यै नमः

मंत्र

ॐ प्रत्यक्षलक्ष्म्यै नमः

मंत्र

ॐ क्षीरसागरवासिन्यै नमः

मंत्र

ॐ वैकुण्ठनगरवासिन्यै नमः

मंत्र

ॐ सर्वराजगृहेस्थितायै नमः

मंत्र

ॐ अखण्डश्रियै नमः

मंत्र

ॐ कान्तायै नमः

मंत्र

ॐ शिवायै नमः

मंत्र

ॐ अमृतोद्भवायै नमः

मंत्र

ॐ लोकसुन्दर्यै नमः

मंत्र

ॐ वैष्णव्यै नमः

मंत्र

ॐ देवदेविकायै नमः

मंत्र

ॐ श्रीहरिप्रियायै नमः

मंत्र

ॐ शुचये नमः

मंत्र

ॐ स्वाहायै नमः

मंत्र

ॐ स्वधायै नमः

मंत्र

ॐ सुधायै नमः

मंत्र

ॐ धन्यायै नमः

मंत्र

ॐ अदित्यै नमः

मंत्र

ॐ दित्ये नमः

मंत्र

ॐ पद्मसुन्दर्यै नमः

मंत्र

ॐ कामाक्ष्यै नमः

मंत्र

ॐ अमृतायै नमः

मंत्र

ॐ धर्मनिलयायै नमः

मंत्र

ॐ पुण्यगन्धायै नमः

मंत्र

ॐ चन्द्रायै नमः

मंत्र

ॐ चतुर्भुजायै नमः

मंत्र

ॐ चन्द्ररूपायै नमः

मंत्र

ॐ इन्दुशीतलायै नमः

मंत्र

ॐ आह्लादजनन्यै नमः

मंत्र

ॐ पुष्ट्यै नमः

मंत्र

ॐ सत्यै नमः

मंत्र

ॐ तुष्ट्यै नमः

मंत्र

ॐ प्रीतिपुष्करिण्यै नमः

लक्ष्मी पूर्ति मंत्र

ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं महालक्ष्मि मम गृहे धनं पूरय पूरय स्वाहा।

त्रिभुवन महालक्ष्मी मंत्र

ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं त्रिभुवन महालक्ष्म्यै अस्माकं दारिद्र्य नाशय प्रचुर धन देहि देहि क्लीं ह्रीं श्रीं ॐ।

गृह-शांति एवं कार्यस्थल मंत्र

ॐ ह्रीं श्रीं क्रीं श्रीं क्रीं क्लीं श्रीं महालक्ष्मी मम गृहे धनं पूरय पूरय चिंतायै दूरय दूरय स्वाहा।

दुर्गा-महालक्ष्मी श्लोक-मंत्र

ॐ सर्वाबाधा विनिर्मुक्तो, धन धान्यः सुतान्वितः। मनुष्यो मत्प्रसादेन भविष्यति न संशयः ॐ।

लक्ष्मी गायत्री मंत्र

ॐ श्री महालक्ष्म्यै च विद्महे विष्णु पत्न्यै च धीमहि तन्नो लक्ष्मी प्रचोदयात् ॐ।

ज्येष्ठा लक्ष्मी मंत्र

ॐ ऐं ह्रीं श्रीं ज्येष्ठ लक्ष्मी स्वयम्भुवे ह्रीं ज्येष्ठायै नमः।

यक्षिणी विद्या महालक्ष्मी

ॐ ह्रीं क्लीं महालक्ष्म्यै नमः।

लक्ष्मी-नृसिंह मंत्र

ॐ ह्रीं क्ष्रौं श्रीं लक्ष्मी नृसिंहाय नमः।

एकादशाक्षर सिद्ध लक्ष्मी मंत्र

ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं श्रीं सिद्ध लक्ष्म्यै नमः।

महाविद्या कमला विकल्प मंत्र

ॐ ऐं ह्रीं श्रीं क्लीं हसौः जगत्प्रसूत्यै नमः।

सूक्ष्म बीज मंत्र

ॐ श्रीं श्रियें नमः।

प्रत्यंगिरा सिद्ध-लक्ष्मी श्लोक

राजमातां राजलक्ष्मीं राजेष्टफलदायिनीम्। प्रत्यङ्गिरां नमस्यामि सिद्धिलक्ष्मीजयप्रदां॥

यक्षिणी धनदा मंत्र

ॐ ह्रीं क्लीं महालक्ष्म्यै नमः।

सर्वसौभाग्य प्रदाता मंत्र

ॐ श्रीं क्लीं महालक्ष्म्यै महालक्ष्म्यै एह्येहि सर्वसौभाग्यं देहि मे स्वाहा।

षोडशाक्षरी कुबेर-लक्ष्मी

ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं महालक्ष्मि महालक्ष्मि एहि एहि सर्वसौभाग्यं देहि मे स्वाहा।

तांत्रिक श्रीविद्या सम्पुटित लक्ष्मी मंत्र

ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं ऐं सौं ॐ ह्रीं क ए ई ल ह्रीं ह स क ह ल ह्रीं सकल ह्रीं सौं ऐं क्लीं ह्रीं श्रीं ॐ।

महालक्ष्मी सौभाग्य मंत्र

ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद सर्वसौभाग्यं देहि देहि स्वाहा।

मंत्र

ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं आद्य लक्ष्म्यै नमः।

मंत्र

ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं धन लक्ष्म्यै नमः।

मंत्र

ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं धान्य लक्ष्म्यै नमः।

मंत्र

ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं गज लक्ष्म्यै नमः।

मंत्र

ॐ ऐं ह्रीं श्रीं संतान लक्ष्म्यै नमः।

मंत्र

ॐ ह्रीं श्रीं वीर लक्ष्म्यै नमः।

मंत्र

ॐ क्लीं ॐ श्रीं विजय लक्ष्म्यै नमः।

मंत्र

ॐ ऐं ॐ श्रीं विद्या लक्ष्म्यै नमः।

पाञ्चरात्र बीज मंत्र (तारिका मंत्र)

ॐ तारिकायै नमः / ॐ ह्रीं

पाञ्चरात्र फलश्रुति मंत्र (श्लोक-मंत्र)

या या मनसि वै यस्य विभूतिः प्रतिभाति च। तां तां ददाति तस्याशु धनधान्यगवादिकाम्॥

स्वर्ण-कवच लक्ष्मी मंत्र

सुवर्णवेष्टितं चाङ्गे लक्ष्मीमन्त्रं शतक्रतो। तस्यायुषो भवेद् वृद्धिः सर्वत्र विजयी महान्॥

पाञ्चरात्र अनुचर मंत्र (कीर्ति)

ॐ कीर्त्यै नमः।

ऋषि चिक्लीत प्रार्थना

आपः सृजन्तु स्निग्धानि चिक्लीत वस मे गृहे। नि च देवीं मातरं श्रियं वासय मे कुले॥

श्रीसूक्त ऋचा (स्थिरता)

तां म आवह जातवेदो लक्ष्मीमनपगामिनीम्। यस्यां हिरण्यं विन्देयं गामश्वं पुरुषानहम्॥

ऋषि कर्दम प्रार्थना

कर्दमेन प्रजाभूता मयि सम्भव कर्दम। श्रियं वासय मे कुले मातरं पद्ममालिनीम्॥

प्रचुर ऐश्वर्य मंत्र

तां म आवह जातवेदो लक्ष्मीमनपगामिनीम्। यस्यां हिरण्यं प्रभूतं गावो दास्योऽश्वान् विन्देयं पूरुषानहम्॥

श्रुतिफल मंत्र

यः शुचिः प्रयतो भूत्वा जुहुयादाज्यमन्वहम्। सूक्तं पञ्चदशर्चं च श्रीकामः सततं जपेत्॥

उपनिषदिक शांति मंत्र

ॐ वाङ्मे मनसि प्रतिष्ठिता मनो मे वाचि प्रतिष्ठितम् आविरावीर्म एधि॥

ऋत-सत्य वाक् मंत्र

वेदस्य म आणीस्थः श्रुतं मे मा प्रहासीरनेनाधीतेनाहोरात्रान्सन्दधाम्यृतं वदिष्यामि सत्यं वदिष्यामि॥

रक्षा एवं शांति मंत्र

तन्मामवतु तद्वक्तारमवतु अवतु मामवतु वक्तारमवतु वक्तारम्॥ ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः॥

राज-ऐश्वर्य मंत्र

अश्वपूर्वां रथमध्यां हस्तिनादप्रबोधिनीम्। श्रियं देवीमुपह्वये श्रीर्मा देवीर्जुषताम्॥

ध्यान ऋचा

कांसोस्मितां हिरण्यप्राकारामार्द्रां ज्वलन्तीं तृप्तां तर्पयन्तीम्। पद्मे स्थितां पद्मवर्णां तामिहोपह्वये श्रियम्॥

अलक्ष्मी नाशक मंत्र

चन्द्रां प्रभासां यशसा ज्वलन्तीं श्रियं लोके देवजुष्टामुदाराम्। तां पद्मिनीमीं शरणमहं प्रपद्येऽलक्ष्मीर्मे नश्यतां त्वां वृणे॥

वनस्पति (बिल्व) मंत्र

आदित्यवर्णे तपसोऽधिजातो वनस्पतिस्तव वृक्षोऽथ बिल्वः। तस्य फलानि तपसानुदन्तु मायान्तरायाश्च बाह्या अलक्ष्मीः॥

कीर्ति-ऋद्धि मंत्र

उपैतु मां देवसखः कीर्तिश्च मणिना सह। प्रादुर्भूतोऽस्मि राष्ट्रेऽस्मिन् कीर्तिमृद्धिं ददातु मे॥

उच्चाटन मंत्र

क्षुत्पिपासामलां ज्येष्ठामलक्ष्मीं नाशयाम्यहम्। अभूतिमसमृद्धिं च सर्वां निर्णुद मे गृहात्॥

पाञ्चरात्र अनुचर मंत्र (जया)

ॐ जयायै नमः।

पुष्टिदात्री मंत्र

आर्द्रां पुष्करिणीं पुष्टिं पिङ्गलां पद्ममालिनीम्। चन्द्रां हिरण्मयीं लक्ष्मीं जातवेदो म आवह॥

सूर्यवर्णा मंत्र

आर्द्रां यः करिणीं यष्टिं सुवर्णां हेममालिनीम्। सूर्यां हिरण्मयीं लक्ष्मीं जातवेदो म आवह॥

सर्वभूत ईश्वरी मंत्र

गन्धद्वारां दुराधर्षां नित्यपुष्टां करीषिणीम्। ईश्वरीं सर्वभूतानां तामिहोपह्वये श्रियम्॥

संकल्प सिद्धि मंत्र

मनसः काममाकूतिं वाचः सत्यमशीमहि। पशूनां रूपमन्नस्य मयि श्रीः श्रयतां यशः॥

एकाक्षरी कमला मंत्र

ॐ श्रीं नमः। (अथवा 'श्रीं')

द्व्यक्षर साम्राज्य लक्ष्मी

ॐ स्ह्क्ल्रीं हं नमः।

त्र्यक्षर कमला मंत्र

ॐ श्रीं क्लीं श्रीं नमः।

चतुरक्षर वाग्भव कमला

ॐ ऐं श्रीं ह्रीं क्लीं नमः।

पञ्चाक्षरी कमला मंत्र

ॐ श्रीं क्लीं श्रीं नमः॥

नवार्ण सिद्धि लक्ष्मी मंत्र

ॐ ह्रीं हूं हां ग्रें क्षों क्रों नमः॥

दशाक्षरी कमला मंत्र

ॐ नमः कमलवासिन्यै स्वाहा॥

द्वादशाक्षर महाविद्या कमला

ॐ ऐं ह्रीं श्रीं क्लीं सौ: जगत्प्रसूत्यै नमः।

महालक्ष्मी मूल मंत्र (दशाक्षरी संपुटित)

ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्म्यै नमः॥

मंत्र

ॐ स्वप्रकाशस्वरूपिण्यै नमः

कनकधारा स्तोत्र (श्लोक 1) *

ॐ देवदेविकायै नमः

कनकधारा स्तोत्र (श्लोक 1) *

ॐ लक्ष्म्यै नमः

कनकधारा स्तोत्र (श्लोक 1) *

ॐ श्रीहरिप्रियायै नमः

द्वादशनाम फलश्रुति

द्वादशैतानि नामानि त्रिसंध्यं यः पठेन्नरः। आयुरारोग्यमैश्वर्यं तस्य पुण्यफलप्रदम्॥

वैभव लक्ष्मी व्रत मूल मंत्र

ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं वैभवलक्ष्म्यै नमः।

वैभव लक्ष्मी ध्यान श्लोक

या रक्ताम्बुजवासिनी विलासिनी चण्डांशुतेजस्विनी, या रक्ता रुधिराम्बरा हरिसखी या श्री मनोल्हादिनी।

मनसा देवी-लक्ष्मी मंत्र

ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं ऐं मनसा देव्यै स्वाहा।

राधा-लक्ष्मी मंत्र

ॐ ह्रीं राधिकायै नमः / ॐ राधायै स्वाहा।

मंत्र

ॐ वाचे नमः

मंत्र

ॐ विश्वजनन्यै नमः

मंत्र

ॐ लोकमात्रे नमः

मंत्र

ॐ त्रिकालज्ञानसम्पन्नायै नमः

मंत्र

ॐ नित्यगतायै नमः

मंत्र

ॐ अनन्तनित्यायै नमः

कनकधारा स्तोत्र (श्लोक 1) *

ॐ शार्ङ्गिण्यै नमः

मंत्र

ॐ कीलिकायै नमः

मंत्र

ॐ प्राणशक्त्यै नमः

मंत्र

ॐ प्रकृत्यै नमः

मंत्र

ॐ विकृत्यै नमः

मंत्र

ॐ विद्यायै नमः

मंत्र

ॐ सर्वभूतहितप्रदायै नमः

मंत्र

ॐ श्रद्धायै नमः

मंत्र

ॐ परमात्मिकायै नमः

मंत्र

ॐ पद्मायै नमः

मंत्र

ॐ कमलोद्भवायै नमः

मंत्र

ॐ पद्मप्रियायै नमः

मंत्र

ॐ पद्महस्तायै नमः

मंत्र

ॐ पद्माक्ष्यै नमः

नाम-त्रय सिद्धि मंत्र

लक्ष्मीर्हरिप्रिया पद्मा एतन्नामत्रयं स्मरन्। सर्वान्कामानवाप्नोति सत्यं सत्यं हि पद्मज॥

पाञ्चरात्र अनुचर मंत्र (माया)

ॐ मायायै नमः।

श्री प्रश्न संहिता त्रिक मंत्र

ॐ विष्णुपत्न्यै नमः ॐ प्रसन्नाक्ष्यै नमः ॐ नारायणसमाश्रितायै नमः।

उपद्रव निवारण मंत्र

ॐ दारिद्र्यध्वंसिन्यै नमः ॐ देवलक्ष्म्यै नमः ॐ सर्वोपद्रवनिवारिण्यै नमः।

त्रिदेवात्मिका लक्ष्मी मंत्र

ॐ नवदुर्गायै नमः ॐ महाकाल्यै नमः ॐ ब्रह्माविष्णुशिवात्मिकायै नमः।

त्रिकाल ज्ञान मंत्र

ॐ त्रिकालज्ञानसम्पन्नायै नमः ॐ भुवनेश्वर्यै नमः।

त्रैलोक्य कुटुंबिनी मंत्र

ॐ श्रीमन्मन्दकटाक्षलब्धविभवब्रह्मेन्द्रगङ्गाधरां, त्वां त्रैलोक्यकुटुम्बिनीं सरसिजां वन्दे मुकुन्दप्रियाम्॥

कनकधारा स्तोत्र (श्लोक 1)

अङ्गं हरेः पुलकभूषणमाश्रयन्ती भृङ्गाङ्गनेव मुकुलाभरणं तमालम्। अङ्गीकृताखिलविभूतिरपाङ्गलीला माङ्गल्यदास्तु मम मङ्गलदेवतायाः॥

कनकधारा (श्लोक 19) / गजलक्ष्मी ध्यान

दिग्घस्तिभिः कनककुम्भमुखावसृष्ट स्वर्वाहिनी विमलचारुजलप्लुताङ्गीम्। प्रातर्नमामि जगतां जननीमशेष लोकाधिनाथगृहिणीममृताब्धिपुत्रीम्॥

कनकधारा शरणागति मंत्र (श्लोक 20)

कमले कमलाक्षवल्लभे त्वं करुणापूरतरङ्गितैरपाङ्गैः। अवलोकय मामकिञ्चनानां प्रथमं पात्रमकृत्रिमं दयायाः॥

कनकधारा फलश्रुति (श्लोक 21)

स्तुवन्ति ये स्तुतिभिरमीभिरन्वहं त्रयीमयीं त्रिभुवनमातरं रमाम्। गुणाधिका गुरुतरभाग्यभागिनो भवन्ति ते भुवि बुधभाविताशयाः॥

लक्ष्मी कवच (शिरो-रक्षा मंत्र)

ॐ शिरो मे विष्णुपत्नी च ललाटं अमृतोद्भवा। चक्षुषी सुविशालाक्षी श्रवणे सागरम्बुजा॥

लक्ष्मी कवच (हृदय-रक्षा मंत्र)

घ्राणं पातु महालक्ष्मीः कण्ठं पातु सरस्वती। भुजौ तु पातु वरदा हृदय पातु सुन्दरी॥

कवच फलश्रुति

य इदं कवचं श्रीदं पठेद्विष्णुप्रियात्मकम्। त्रैलोक्यं विजितं तेन येन वा धारितं भवेत्॥

वैदिक आवाहन मंत्र

ॐ हिरण्यवर्णां हरिणीं सुवर्णरजतस्रजाम्। चन्द्रां हिरण्मयीं लक्ष्मीं जातवेदो म आवह॥

लक्ष्मी हृदय स्तोत्र (श्लोक 9)

वसुन्धरे श्री वसुधे वसुदोग्ध्रे कृपामयि! त्वत्कुक्षिगतं सर्वस्वं शीघ्रं मे त्वं प्रदर्शय॥

लक्ष्मी हृदय स्तोत्र (श्लोक 10)

विष्णुप्रिये! रत्नगर्भे! समस्तफलदे शिवे! त्वद्गर्भगतहेमादीन् सम्प्रदर्शय दर्शय॥

लक्ष्मी स्थिरीकरण मंत्र (श्लोक 11)

अत्रोपविश्य लक्ष्मि! त्वं स्थिरा भव हिरण्मयि! सुस्थिरा भव सुप्रीत्या प्रसन्नवरदा भव॥

लक्ष्मी हृदय स्तोत्र (श्लोक 15)

समागच्छ महालक्ष्मि! धन्यधान्यसमन्विते! प्रसीद पुरतः स्थित्वा प्रणतं मां विलोकय॥

सुवर्ण दृष्टि मंत्र (श्लोक 16)

दयासुदृष्टिं कुरुतां मयि श्रीः! सुवर्णदृष्टिं कुरु मे गृहे श्रीः॥

कनकधारा स्तोत्र (श्लोक 1) *

ॐ ईश्वर्यै (श्रियै) नमः

कनकधारा स्तोत्र (श्लोक 1) *

ॐ अमृतोद्भवायै नमः

कनकधारा स्तोत्र (श्लोक 1) *

ॐ कमलायै नमः

कनकधारा स्तोत्र (श्लोक 1) *

ॐ लोकसुन्दर्यै नमः

कनकधारा स्तोत्र (श्लोक 1) *

ॐ विष्णुपत्न्यै नमः

कनकधारा स्तोत्र (श्लोक 1) *

ॐ वैष्णव्यै नमः

कनकधारा स्तोत्र (श्लोक 1) *

ॐ वरारोहायै नमः

कनकधारा स्तोत्र (श्लोक 1) *

ॐ हरिवल्लभायै नमः