ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
शास्त्रीय पौराणिक मंत्र

माँ लक्ष्मी मंत्र

गन्धद्वारां दुराधर्षां नित्यपुष्टां करीषिणीम्। ईश्वरीं सर्वभूतानां तामिहोपह्वये श्रियम्॥

साधना मंडल

जप, संकल्प और उपासना संकेत

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प्रकारसर्वभूत ईश्वरी मंत्र
स्वरूपधान्यलक्ष्मी
अर्थ एवं भावार्थ

इस मंत्र का अर्थ

जो सुगंध से प्राप्त होती हैं, नित्य पुष्ट हैं और पशुधन से युक्त हैं, उन समस्त प्राणियों की स्वामिनी का मैं आवाहन करता हूँ।

लाभ एक दृष्टि में

इस मंत्र से क्या होगा?

01

कृषि, भूमि और गंध-पुष्पादि की वृद्धि

विस्तृत लाभ

कृषि, भूमि और गंध-पुष्पादि की वृद्धि।

जप काल

भूमि पूजन के समय।

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