शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
माँ लक्ष्मी मंत्र
गन्धद्वारां दुराधर्षां नित्यपुष्टां करीषिणीम्। ईश्वरीं सर्वभूतानां तामिहोपह्वये श्रियम्॥
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारसर्वभूत ईश्वरी मंत्र
स्वरूपधान्यलक्ष्मी
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
जो सुगंध से प्राप्त होती हैं, नित्य पुष्ट हैं और पशुधन से युक्त हैं, उन समस्त प्राणियों की स्वामिनी का मैं आवाहन करता हूँ।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
कृषि, भूमि और गंध-पुष्पादि की वृद्धि
विस्तृत लाभ
कृषि, भूमि और गंध-पुष्पादि की वृद्धि।
जप काल
भूमि पूजन के समय।
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ अखिलानन्दिन्यै नमः
ॐ हृषीकेशाय नमः
ॐ दिव्याभरणशोभिने नमः।
ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे। ॐ ग्लौं हुं क्लीं जूं सः ज्वालय ज्वालय ज्वल ज्वल प्रज्वल प्रज्वल ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ज्वल हं सं लं क्षं फट् स्वाहा॥
सद्योजातं प्रपद्यामि सद्योजाताय वै नमो नमः। भवे भवे नातिभवे भवस्व मां भवोद्भवाय नमः॥
ॐ नन्दिने नमः