माँ लक्ष्मी मंत्र
आपः सृजन्तु स्निग्धानि चिक्लीत वस मे गृहे। नि च देवीं मातरं श्रियं वासय मे कुले॥
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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इस मंत्र का अर्थ
जल स्निग्ध पदार्थों को उत्पन्न करे। हे चिक्लीत ऋषि! आप मेरे घर में निवास करें और श्रीदेवी को मेरे कुल में बसाएं।
इस मंत्र से क्या होगा?
घर में प्रेम, सद्भाव का निवास
विस्तृत लाभ
घर में प्रेम, सद्भाव का निवास।
जप काल
जल/कलश स्थापन के समय।
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
न श्रुतं कवचं देव न चोक्तं भवता मम। इति पृष्टः स गिरिशो मन्त्रयन्त्राङ्गतत्त्ववित्॥
ॐ अग्निगर्भाय नमः
ॐ अच्युतायै नमः
ऊर्ध्वे महाकाल भैरवाय नमः ऊर्ध्वे मां रक्ष रक्ष काल कंटकान् भक्ष भक्ष आवाहयाम्यहं इत्र तिष्ठ तिष्ठ हुं फट् स्वाहा।
कल्हारांबुज बीजपूरक गदा दन्तेक्षु बाणैः सदा बिभ्राणो मणिकुम्भ शालिकलशौ पाशं च चक्रान्वितम् । गौराङ्ग्या रुचिराविन्दकरया देव्या सदा संयुतः शोणाङ्कुश शुभमातनोतु भजतामुद्दण्डविघ्नेश्वरः ॥
नारायणाद् ब्रह्मा जायते। नारायणाद् रुद्रो जायते।