शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
माँ लक्ष्मी मंत्र
चन्द्रां प्रभासां यशसा ज्वलन्तीं श्रियं लोके देवजुष्टामुदाराम्। तां पद्मिनीमीं शरणमहं प्रपद्येऽलक्ष्मीर्मे नश्यतां त्वां वृणे॥
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारअलक्ष्मी नाशक मंत्र
स्वरूपचन्द्रप्रभा
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
चन्द्रमा के समान प्रकाशमयी, देवों द्वारा सेवित पद्मिनी की मैं शरण लेता हूँ। मेरी अलक्ष्मी नष्ट हो।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
दुर्भाग्य (अलक्ष्मी) का शमन
विस्तृत लाभ
दुर्भाग्य (अलक्ष्मी) का शमन।
जप काल
दरिद्रता नाश हेतु संध्याकाल में जप।
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