माँ लक्ष्मी मंत्र
ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं ऐं मनसा देव्यै स्वाहा।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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इस मंत्र का अर्थ
जिस प्रकार भ्रमरी तमाल वृक्ष का आश्रय लेती है, उसी प्रकार श्री हरि के शरीर का आश्रय लेने वाली मंगल-देवता लक्ष्मी की कृपा-दृष्टि मेरे लिए मंगलदायिनी हो। *
इस मंत्र से क्या होगा?
विष-भय निवारण, धन-संरक्षण और नाग-दोष शांति
देवी भागवत पुराण में मनसा देवी को लक्ष्मी का ही अंश माना गया है
विस्तृत लाभ
विष-भय निवारण, धन-संरक्षण और नाग-दोष शांति। देवी भागवत पुराण में मनसा देवी को लक्ष्मी का ही अंश माना गया है 54।
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
तव करकमलवरे नखमद्भुतशृंगं दलितहिरण्यकशिपुतनुभृंगम्। केशव धृतनरहरिरूप जय जगदीश हरे॥
ॐ श्रीं कृष्णाय श्रीं । श्रीं श्रीं गोविन्दाय गोपालाय गोलोक सुन्दराय सत्याय नित्याय परमात्मने पराय वैखानसाय विराजमूर्तये मेघात्मने श्रीम नरसिंहवपुषे नमः
ॐ अन्तर्याम्यै नमः
ॐ भूतकृते नमः
ॐ पार्वतीप्रियनन्दनाय नमः
ॐ सहस्रहस्तायै नमः