शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
माँ लक्ष्मी मंत्र
ॐ ऐं ॐ श्रीं विद्या लक्ष्म्यै नमः।
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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स्वरूपविद्या लक्ष्मी
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
दिव्य ज्ञान और विवेक स्वरूप विद्या-लक्ष्मी को नमस्कार।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
ज्ञान, कला, संगीत, कौशल, विवेक की प्राप्ति
विस्तृत लाभ
ज्ञान, कला, संगीत, कौशल, विवेक की प्राप्ति 11।
जप काल
अध्ययन कक्ष में स्फटिक की माला से जप।
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ सहस्रार ज्वालावर्तिने क्ष्रौम् हन हन हुं फट् स्वाहा
ॐ पशुपतये नमः
ॐ गङ्गासुताय नमः
ॐ नमो भगवति सरस्वति परमेश्वरि। वाग्वादिनि मम विद्यां देहि भगवति। भंसवाहिनि हंससमारूढे बुद्धिं देहि देहि। प्रज्ञां देहि देहि विद्यां परमेश्वरि सरस्वति स्वाहा॥
पाशाङ्कुशापूप कुठारदन्तं चञ्चत्करकॢप्त वराङ्गुलीयकम् । पीतप्रभं कल्पतरोरधस्थं भजामि नृत्तोपपदं गणेशम् ॥
ॐ क्लीं वीं रूं ध्रूं घ्नीं ह्रीं बटुक भैरवाय नमः स्वाहा।