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शास्त्रीय पौराणिक मंत्र

त्रिभुवन महालक्ष्मी मंत्र

ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं त्रिभुवन महालक्ष्म्यै अस्माकं दारिद्र्य नाशय प्रचुर धन देहि देहि क्लीं ह्रीं श्रीं ॐ।

साधना मंडल

जप, संकल्प और उपासना संकेत

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अर्थ एवं भावार्थ

इस मंत्र का अर्थ

हे तीनों लोकों की स्वामिनी! हमारे दारिद्र्य का नाश करें और प्रचुर धन प्रदान करें।

लाभ एक दृष्टि में

इस मंत्र से क्या होगा?

01

घोर दरिद्रता का नाश, अचानक धन (Abundance)

विस्तृत लाभ

घोर दरिद्रता का नाश, अचानक धन (Abundance)।

जप काल

72 दिन में 1.25 लाख जप, फिर दशांश हवन 25।

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