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शास्त्रीय पौराणिक मंत्र

माँ लक्ष्मी मंत्र

ॐ शिरो मे विष्णुपत्नी च ललाटं अमृतोद्भवा। चक्षुषी सुविशालाक्षी श्रवणे सागरम्बुजा॥

साधना मंडल

जप, संकल्प और उपासना संकेत

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प्रकारलक्ष्मी कवच (शिरो-रक्षा मंत्र)
अर्थ एवं भावार्थ

इस मंत्र का अर्थ

मेरे सिर की रक्षा विष्णु-पत्नी करें, ललाट की अमृतोद्भवा, नेत्रों की सुविशालाक्षी और कानों की रक्षा समुद्र से उत्पन्न देवी करें 45।

लाभ एक दृष्टि में

इस मंत्र से क्या होगा?

01

मानसिक शांति, सकारात्मक विचार और कुदृष्टि से रक्षा

विस्तृत लाभ

मानसिक शांति, सकारात्मक विचार और कुदृष्टि से रक्षा।

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