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शास्त्रीय पौराणिक मंत्र

दुर्गा-महालक्ष्मी श्लोक-मंत्र

ॐ सर्वाबाधा विनिर्मुक्तो, धन धान्यः सुतान्वितः। मनुष्यो मत्प्रसादेन भविष्यति न संशयः ॐ।

साधना मंडल

जप, संकल्प और उपासना संकेत

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अर्थ एवं भावार्थ

इस मंत्र का अर्थ

मेरे (देवी के) प्रसाद से मनुष्य सभी बाधाओं से मुक्त होकर धन, धान्य और पुत्रों से संपन्न होगा।

लाभ एक दृष्टि में

इस मंत्र से क्या होगा?

01

बाधाओं का नाश, उत्तम संतति और अटूट धन

विस्तृत लाभ

बाधाओं का नाश, उत्तम संतति और अटूट धन।

जप काल

दुर्गा सप्तशती के संपुट रूप में 25।

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