शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
माँ लक्ष्मी मंत्र
अङ्गं हरेः पुलकभूषणमाश्रयन्ती भृङ्गाङ्गनेव मुकुलाभरणं तमालम्। अङ्गीकृताखिलविभूतिरपाङ्गलीला माङ्गल्यदास्तु मम मङ्गलदेवतायाः॥
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारकनकधारा स्तोत्र (श्लोक 1)
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
जिस प्रकार भ्रमरी तमाल वृक्ष का आश्रय लेती है, उसी प्रकार श्री हरि के शरीर का आश्रय लेने वाली मंगल-देवता लक्ष्मी की कृपा-दृष्टि मेरे लिए मंगलदायिनी हो।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
घर में स्वर्ण (धन) की वर्षा, दरिद्रता का तत्काल नाश
विस्तृत लाभ
घर में स्वर्ण (धन) की वर्षा, दरिद्रता का तत्काल नाश 15।
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