शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
माँ लक्ष्मी मंत्र
वसुन्धरे श्री वसुधे वसुदोग्ध्रे कृपामयि! त्वत्कुक्षिगतं सर्वस्वं शीघ्रं मे त्वं प्रदर्शय॥
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारलक्ष्मी हृदय स्तोत्र (श्लोक 9)
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
हे वसुंधरे, हे श्री, हे कृपामयी! आपके गर्भ (कुक्षि) में जो भी सर्वस्व है, वह मुझे शीघ्र प्रदर्शित करें 14।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
पृथ्वी या भूमि में छिपे हुए रत्नों/संपत्ति की प्राप्ति
विस्तृत लाभ
पृथ्वी या भूमि में छिपे हुए रत्नों/संपत्ति की प्राप्ति।
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