शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
स्कंद षष्ठी कवचम्
थुतिप्पोरक्कु वल्विणैपोम् तुन्बम्पोम् नेञ्जिल् पतिप्पोरक्कु सेल्वम् पलिथ्थुक्
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारमंगलाचरण
स्वरूपषण्मुख (तमिल परंपरा)
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
स्तुति करने वालों के दुःख-पाप नष्ट होते हैं, और जो उन्हें हृदय में बसाते हैं, उनकी संपदा बढ़ती है।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
दरिद्रता, दुःख और पापों का नाश
विस्तृत लाभ
दरिद्रता, दुःख और पापों का नाश।
जप काल
षष्ठी के दिन नित्य पाठ।
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ विजयाय नमः
ॐ सर्वस्मै नमः
ॐ अनघाय नमः
ॐ अन्तःकरणवासिन्यै नमः
योगारूढो योगपट्टाभिरामः बालार्कभाश्च नीलांगशुकः । पाशेक्ष्वाक्षान् योगदण्डं दधानः पायान्नित्यं योगविघ्नेश्वरः नः ॥
ॐ ह्रीं क्लीं वाण्यै स्वाहेति मम पृष्ठं सदाऽवतु। (स्वरूप: वाणी | लाभ: पीठ और मेरुदंड की रक्षा | अर्थ: वाणी मेरी पीठ की सदा रक्षा करें) 8