शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
स्कंद षष्ठी कवचम्
थुतिप्पोरक्कु वल्विणैपोम् तुन्बम्पोम् नेञ्जिल् पतिप्पोरक्कु सेल्वम् पलिथ्थुक्
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारमंगलाचरण
स्वरूपषण्मुख (तमिल परंपरा)
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
स्तुति करने वालों के दुःख-पाप नष्ट होते हैं, और जो उन्हें हृदय में बसाते हैं, उनकी संपदा बढ़ती है।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
दरिद्रता, दुःख और पापों का नाश
विस्तृत लाभ
दरिद्रता, दुःख और पापों का नाश।
जप काल
षष्ठी के दिन नित्य पाठ।
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ गोपीकरावलाम्बिने नमः
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ॐ यो वै रामचन्द्रः स भगवान् ये साक्षान्मृत्युः तस्मै वै नमो नमः भूर्भुवः स्वः
ॐ वर्णिनें नमः
पत्नीं मनोरमां देहि मनोवृत्तानुसारिणीम्। तारिणीं दुर्गसंसारसागरस्य कुलोद्भवाम्॥ 42
उमासहायं परमेश्वरं प्रभुं त्रिलोचनं नीलकण्ठं प्रशान्तम्। ध्यात्वा मुनिर्गच्छति भूतयोनिं समस्तसाक्षिं तमसः परस्तात्॥