शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
द्व्यक्षर साम्राज्य लक्ष्मी
ॐ स्ह्क्ल्रीं हं नमः।
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
यह एक कूट-बीज है जो साम्राज्य और शक्ति का ध्वनि-प्रतीक है।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
राजसत्ता, उच्च प्रशासनिक सफलता
विस्तृत लाभ
राजसत्ता, उच्च प्रशासनिक सफलता।
जप काल
ग्रहण या अमावस्या की रात्रि में।
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
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ॐ अनादये नमः
ॐ वीरवराग्रगाय नमः
ॐ कपालभृते नमः।
ॐ वटुवेषभृते नमः
ॐ गुरुजी को आदेश गुरुजी को प्रणाम, धरती माता धरती पिता, धरती धरे ना धीर बाजे श्रृंगी बाजे तुरतुरी आया गोरखनाथ मीन का पूत मुंज का छड़ा लोहे का कड़ा हमारी पीठ पीछे यती हनुमंत खड़ा, शब्द सांचा पिंड काचा फुरो मंत्र ईश्वरो वाचा।