शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
माँ लक्ष्मी मंत्र
तां म आवह जातवेदो लक्ष्मीमनपगामिनीम्। यस्यां हिरण्यं विन्देयं गामश्वं पुरुषानहम्॥
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारश्रीसूक्त ऋचा (स्थिरता)
स्वरूपअनपगामिनी लक्ष्मी
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
हे अग्नि! उन स्थिर रहने वाली लक्ष्मी का आवाहन करें, जिनसे मैं सुवर्ण, गौ, अश्व और सेवकों को प्राप्त करूँ।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
स्थिर धन, पशुधन, संतति
विस्तृत लाभ
स्थिर धन, पशुधन, संतति।
जप काल
श्रीयंत्र के सम्मुख शुक्रवार को जप।
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