शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
माँ लक्ष्मी मंत्र
ॐ हिरण्मय्यै नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
शुद्ध स्वर्णमयी कांति वाली देवी को नमन।
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ ज्ञानभव्याय नमः
ॐ रक्तमालाविभूषाय नमः
पाँचों त्रिशेम चलें, लांगुरिया सलार चलें। भीम की गदा चले, हनुमान की हाँक चले। नाहर की धाक चलै, नहीं चलै, तो हजरत सुलेमान के तखत की दुहाई है। एक लाख अस्सी हजार पीर व पैगम्बरों की दुहाई है। चलो मन्त्र, ईश्वर वाचा। गुरु का शब्द साँचा।
ॐ अन्तःकरणवासिन्यै नमः
ॐ वित्तायै नमः
ॐ भुवनेश्वर्यै नमः