तांत्रिक श्रीविद्या सम्पुटित लक्ष्मी मंत्र
ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं ऐं सौं ॐ ह्रीं क ए ई ल ह्रीं ह स क ह ल ह्रीं सकल ह्रीं सौं ऐं क्लीं ह्रीं श्रीं ॐ।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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इस मंत्र का अर्थ
यह पंचदशी विद्या से सम्पुटित श्रीविद्या का सर्वोच्च कूट-मंत्र है, जो देवी के त्रिविध शरीरों का नाद रूप है।
इस मंत्र से क्या होगा?
व्यापार में अभूतपूर्व वृद्धि और दरिद्रता का समूल नाश
विस्तृत लाभ
व्यापार में अभूतपूर्व वृद्धि और दरिद्रता का समूल नाश।
जप काल
केवल गुरु-दीक्षा प्राप्त साधकों द्वारा दीपावली की रात्रि में 21 माला 25।
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
श्रीं विद्याधिष्ठातृदेव्यै स्वाहा वक्षः सदाऽवतु। (स्वरूप: विद्याधिष्ठात्री | लाभ: हृदय व वक्ष-स्थल की रक्षा | अर्थ: विद्या देवी मेरे वक्ष की रक्षा करें) 8
योगारूढो योगपट्टाभिरामः बालार्कभाश्च नीलांगशुकः । पाशेक्ष्वाक्षान् योगदण्डं दधानः पायान्नित्यं योगविघ्नेश्वरः नः ॥
ॐ वासुदेवाय नमः
ॐ अनेकात्मने नमः
ॐ श्रीकृष्णप्रियवादिन्यै नमः
ॐ कमण्डलुधराय नमः