शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
तांत्रिक श्रीविद्या सम्पुटित लक्ष्मी मंत्र
ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं ऐं सौं ॐ ह्रीं क ए ई ल ह्रीं ह स क ह ल ह्रीं सकल ह्रीं सौं ऐं क्लीं ह्रीं श्रीं ॐ।
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
यह पंचदशी विद्या से सम्पुटित श्रीविद्या का सर्वोच्च कूट-मंत्र है, जो देवी के त्रिविध शरीरों का नाद रूप है।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
व्यापार में अभूतपूर्व वृद्धि और दरिद्रता का समूल नाश
विस्तृत लाभ
व्यापार में अभूतपूर्व वृद्धि और दरिद्रता का समूल नाश।
जप काल
केवल गुरु-दीक्षा प्राप्त साधकों द्वारा दीपावली की रात्रि में 21 माला 25।
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