महालक्ष्मी मूल मंत्र (दशाक्षरी संपुटित)
ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्म्यै नमः॥
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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इस मंत्र का अर्थ
हे कमल पर विराजने वाली महालक्ष्मी! मुझ पर प्रसन्न हों, आपको नमन है 28।
इस मंत्र से क्या होगा?
पीढ़ियों तक स्थिर संपत्ति, ऋण-मुक्ति
विस्तृत लाभ
पीढ़ियों तक स्थिर संपत्ति, ऋण-मुक्ति।
जप काल
72 दिनों में 1.25 लाख जप का विधान 25।
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ गुरुजी को आदेश गुरुजी को प्रणाम, धरती माता धरती पिता, धरती धरे ना धीर बाजे श्रृंगी बाजे तुरतुरी आया गोरखनाथ मीन का पूत मुंज का छड़ा लोहे का कड़ा हमारी पीठ पीछे यती हनुमंत खड़ा, शब्द सांचा पिंड काचा फुरो मंत्र ईश्वरो वाचा।
ॐ नमो भगवते नरसिंहाय नमस्तेजस्तेजसे आविराविर्भव वज्रनख वज्रदंष्ट्र कर्माशयान् रन्धय रन्धय तमो ग्रस ग्रस ॐ स्वाहा। अभयमभयमात्मनि भूयिष्ठा ॐ क्ष्रौम्॥
अग्निश्च मे आपश्च मे वीरुधश्च मे...
ॐ कान्ताय नमः।
श्री राम जय राम जय जय राम (Sri Ram Jaya Ram Jaya Jaya Ram)
ॐ प्राज्ञ्यै नमः