ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
शास्त्रीय पौराणिक मंत्र

माँ लक्ष्मी मंत्र

यः शुचिः प्रयतो भूत्वा जुहुयादाज्यमन्वहम्। सूक्तं पञ्चदशर्चं च श्रीकामः सततं जपेत्॥

साधना मंडल

जप, संकल्प और उपासना संकेत

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प्रकारश्रुतिफल मंत्र
स्वरूपफलदायिनी श्री
अर्थ एवं भावार्थ

इस मंत्र का अर्थ

जो मनुष्य पवित्र होकर घी से आहुति देता है और श्री की कामना से इन पंद्रह ऋचाओं का जप करता है, वह समृद्ध होता है।

लाभ एक दृष्टि में

इस मंत्र से क्या होगा?

01

अनुष्ठान की पूर्णता

विस्तृत लाभ

अनुष्ठान की पूर्णता।

जप काल

साधना के अंत में।

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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र

शुक्लाम्बरधरं देवं शशिवर्णं चतुर्भुजम् । प्रसन्नवदनं ध्यायेत् सर्वविघ्नोपशान्तये ॥

ॐ त्रिविक्रमाय नमः

ॐ ह्रः ॐ सौं ॐ वैं ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं श्रीजयजय चण्डिकायै नमः। ॐ स्वीं स्वीं विध्वंसय विध्वंसय ॐ प्लूं प्लूं प्लावय प्लावय... (अति विस्तृत तांत्रिक शृंखला)... ॐ चामुण्डायै विच्चे स्वाहा। मम सकल मनोरथं देहि देहि, सर्वोपद्रवं निवारय निवारय... भञ्जय भञ्जय ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं स्वाहा॥

ॐ बालदोलाशयशयाय नमः

ॐ करौ मे देववरदो नृसिंहः पातु सर्वतः

पंचास्यमच्युतमनेकविचित्रवीर्यं श्रीशंखचक्ररमणीयभुजाग्रदेशम्। पीताम्बरं मकरकुण्डलनूपुराङ्गं ध्यायेतितं कपिवरं हृदि भावयामि॥