शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
माँ लक्ष्मी मंत्र
यः शुचिः प्रयतो भूत्वा जुहुयादाज्यमन्वहम्। सूक्तं पञ्चदशर्चं च श्रीकामः सततं जपेत्॥
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारश्रुतिफल मंत्र
स्वरूपफलदायिनी श्री
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
जो मनुष्य पवित्र होकर घी से आहुति देता है और श्री की कामना से इन पंद्रह ऋचाओं का जप करता है, वह समृद्ध होता है।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
अनुष्ठान की पूर्णता
विस्तृत लाभ
अनुष्ठान की पूर्णता।
जप काल
साधना के अंत में।
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