शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
माँ लक्ष्मी मंत्र
ॐ ओष्ठं पातु कृपादेवी।
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकाररक्षा कवच मंत्र;
स्वरूपकृपादेवी
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
कृपा की देवी मेरे होंठ की रक्षा करें।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
अंग: ऊपरी होंठ की रक्षा
विस्तृत लाभ
अंग: ऊपरी होंठ की रक्षा।
टिप्पणी
इस कवच के मंत्रों को न्यास (शरीर के अंगों को स्पर्श करते हुए) के रूप में जपा जाता है।
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ परतत्त्वाय नमः
ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं त्रिभुवन महालक्ष्म्यै अस्माकं दारिद्र्य नाशय प्रचुर धन देहि देहि क्लीं ह्रीं श्रीं ॐ।
जयत्यतिबलो रामो लक्ष्मणश्च महाबलः। राजा जयति सुग्रीवो राघवेणाभिपालितः॥ दासोऽहं कोसलेन्द्रस्य रामस्याक्लिष्टकर्मणः। हनुमान् शत्रुसैन्यानां निहन्ता मारुतात्मजः॥
ॐ सहस्रशीर्षायै नमः
ॐ विश्वयोनये नमः
ॐ करदानपरायणायै नमः