शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
माँ लक्ष्मी मंत्र
या या मनसि वै यस्य विभूतिः प्रतिभाति च। तां तां ददाति तस्याशु धनधान्यगवादिकाम्॥
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारपाञ्चरात्र फलश्रुति मंत्र (श्लोक-मंत्र)
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
साधक के मन में जिस-जिस विभूति की इच्छा उत्पन्न होती है, देवी शीघ्र ही उसे वह धन, धान्य और गोधन प्रदान करती हैं।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
जो भी ऐश्वर्य मन में कल्पित किया जाए, उसकी तत्काल प्राप्ति
विस्तृत लाभ
जो भी ऐश्वर्य मन में कल्पित किया जाए, उसकी तत्काल प्राप्ति 39।
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ परात्पराय नमः
सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके। शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते॥ 17
ॐ संकर्षणाय नमः
ॐ अग्रपूज्याय नमः
आग्नेये रूरु भैरवाय नमः आग्नेये मां रक्ष रक्ष काल कंटकान् भक्ष भक्ष आवाहयाम्यहं इत्र तिष्ठ तिष्ठ हुं फट् स्वाहा।
ॐ क्रीं क्रीं क्रीं हूँ हूँ ह्रीं ह्रीं दक्षिणे कालिके क्रीं क्रीं क्रीं हूँ हूँ ह्रीं ह्रीं स्वाहा॥