शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
माँ लक्ष्मी मंत्र
ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं वैभवलक्ष्म्यै नमः।
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारवैभव लक्ष्मी व्रत मूल मंत्र
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
जिस प्रकार भ्रमरी तमाल वृक्ष का आश्रय लेती है, उसी प्रकार श्री हरि के शरीर का आश्रय लेने वाली मंगल-देवता लक्ष्मी की कृपा-दृष्टि मेरे लिए मंगलदायिनी हो। *
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
परिवार में सुख-शांति, दरिद्रता का नाश और मनोकामना पूर्ति
विस्तृत लाभ
परिवार में सुख-शांति, दरिद्रता का नाश और मनोकामना पूर्ति 51।
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