शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
माँ लक्ष्मी मंत्र
सुवर्णवेष्टितं चाङ्गे लक्ष्मीमन्त्रं शतक्रतो। तस्यायुषो भवेद् वृद्धिः सर्वत्र विजयी महान्॥
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारस्वर्ण-कवच लक्ष्मी मंत्र
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
हे इन्द्र! जो सुवर्ण में वेष्टित करके लक्ष्मी मंत्र को शरीर पर धारण करता है, उसकी आयु बढ़ती है और वह सर्वत्र विजयी होता है।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
दीर्घायु और सर्वत्र महान विजय की प्राप्ति
विस्तृत लाभ
दीर्घायु और सर्वत्र महान विजय की प्राप्ति 39।
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