शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
माँ लक्ष्मी मंत्र
कांसोस्मितां हिरण्यप्राकारामार्द्रां ज्वलन्तीं तृप्तां तर्पयन्तीम्। पद्मे स्थितां पद्मवर्णां तामिहोपह्वये श्रियम्॥
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारध्यान ऋचा
स्वरूपपद्मा/कमला
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
जो ईषत् हास्य वाली, स्वर्ण-आवरण युक्त, दयार्द्र, तेजोमयी, स्वयं तृप्त और कमलवर्णा हैं, उनका मैं आवाहन करता हूँ।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
मानसिक शांति, संतुष्टि
विस्तृत लाभ
मानसिक शांति, संतुष्टि।
जप काल
नित्य पूजा में ध्यान के समय।
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