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शास्त्रीय पौराणिक मंत्र

माँ लक्ष्मी मंत्र

द्वादशैतानि नामानि त्रिसंध्यं यः पठेन्नरः। आयुरारोग्यमैश्वर्यं तस्य पुण्यफलप्रदम्॥

साधना मंडल

जप, संकल्प और उपासना संकेत

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प्रकारद्वादशनाम फलश्रुति
अर्थ एवं भावार्थ

इस मंत्र का अर्थ

जिस प्रकार भ्रमरी तमाल वृक्ष का आश्रय लेती है, उसी प्रकार श्री हरि के शरीर का आश्रय लेने वाली मंगल-देवता लक्ष्मी की कृपा-दृष्टि मेरे लिए मंगलदायिनी हो। *

लाभ एक दृष्टि में

इस मंत्र से क्या होगा?

01

जो मनुष्य तीनों संध्याओं में इन 12 नामों का पाठ करता है, उसे आयु, आरोग्य और ऐश्वर्य का पुण्यफल प्राप्त होता है

विस्तृत लाभ

जो मनुष्य तीनों संध्याओं में इन 12 नामों का पाठ करता है, उसे आयु, आरोग्य और ऐश्वर्य का पुण्यफल प्राप्त होता है 42।

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