शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
माँ लक्ष्मी मंत्र
ॐ हिरण्यवर्णां हरिणीं सुवर्णरजतस्रजाम्। चन्द्रां हिरण्मयीं लक्ष्मीं जातवेदो म आवह॥
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारवैदिक आवाहन मंत्र
स्वरूपहिरण्मयी लक्ष्मी
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
हे अग्निदेव! स्वर्ण-वर्णा, सोने-चांदी की मालाओं से सुशोभित, आह्लादक देवी लक्ष्मी का मेरे लिए आवाहन करें।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
सर्व-समृद्धि, सुवर्ण-प्राप्ति
विस्तृत लाभ
सर्व-समृद्धि, सुवर्ण-प्राप्ति।
जप काल
प्रातःकाल, अग्नि में घृत-आहुति।
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ श्रीं कृष्णाय श्रीं । श्रीं श्रीं गोविन्दाय गोपालाय गोलोक सुन्दराय सत्याय नित्याय परमात्मने पराय वैखानसाय विराजमूर्तये मेघात्मने श्रीम नरसिंहवपुषे नमः
ॐ पुरुषाय नमः
ॐ नमो भगवते महोग्र दिग्बन्धन नरसिंहाय ज्वालामुखाय अग्निनेत्राय... हन हन दह दह पच पच बन्ध बन्ध कील कील स्वाहा
ॐ सर्ववर्णायै नमः
ॐ यो वै रामचन्द्रः स भगवान् ये सप्तव्याहृतिः तस्मै वै नमो नमः भूर्भुवः स्वः
ॐ वत्सलाय नमः