ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
शास्त्रीय पौराणिक मंत्र

माँ लक्ष्मी मंत्र

य इदं कवचं श्रीदं पठेद्विष्णुप्रियात्मकम्। त्रैलोक्यं विजितं तेन येन वा धारितं भवेत्॥

साधना मंडल

जप, संकल्प और उपासना संकेत

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प्रकारकवच फलश्रुति
अर्थ एवं भावार्थ

इस मंत्र का अर्थ

जिस प्रकार भ्रमरी तमाल वृक्ष का आश्रय लेती है, उसी प्रकार श्री हरि के शरीर का आश्रय लेने वाली मंगल-देवता लक्ष्मी की कृपा-दृष्टि मेरे लिए मंगलदायिनी हो। *

लाभ एक दृष्टि में

इस मंत्र से क्या होगा?

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जो यह श्रीप्रदायक विष्णुप्रियात्मक कवच पढ़ता या धारण करता है, वह तीनों लोकों को जीत लेता है

विस्तृत लाभ

जो यह श्रीप्रदायक विष्णुप्रियात्मक कवच पढ़ता या धारण करता है, वह तीनों लोकों को जीत लेता है 13।

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