शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
कुमार सूक्त मंत्र 2
अयं यः सृञ्जये पुरो दैववाते समिध्यते । द्युमाँ अमित्रदम्भनः ॥
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
जप काउंटर लोड हो रहा है...
प्रकारवैदिक रक्षा मंत्र
स्वरूपअमित्रदम्भन (शत्रु-नाशक)
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
देववात के पुत्र सृञ्जय के लिए प्रज्वलित यह अग्नि दीप्तिमान और शत्रुओं का नाश करने वाली है।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
विरोधियों का शमन, यश व कीर्ति की प्राप्ति
विस्तृत लाभ
विरोधियों का शमन, यश व कीर्ति की प्राप्ति।
जप काल
वैदिक आहुति के साथ।
इसे भी पढ़ें
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
नमामि भार्गवं रामं रेणुकाचित्तनन्दनं। मोचिताम्बार्तिमुत्पातनाशनं क्षत्रनाशनम्॥
ॐ विघ्नराजाय नमः
विश्वेश्वरि त्वं परिपासि विश्वं विश्वात्मिका धारयसीति विश्वम्। विश्वेशवन्द्या भवती भवन्ति विश्वाश्रया ये त्वयि भक्तिनम्राः॥ 18
ॐ प्रभूताय नमः
ॐ यो वै रामचन्द्रः स भगवान् ये देवीपार्वती तस्मै वै नमो नमः भूर्भुवः स्वः
ॐ कमलनेत्रायै नमः