शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
माँ लक्ष्मी मंत्र
ॐ भविष्यच्चतुराननाय नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
जप काउंटर लोड हो रहा है...
स्वरूपभावी ब्रह्मा
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
जो भविष्य के कल्प में चतुरानन (ब्रह्मा) का पद ग्रहण करेंगे, उन्हें नमन।
जप काल
नित्य प्रातः काल, लाल आसन पर बैठकर रुद्राक्ष या लाल चंदन की माला से 108 नामों का क्रमशः उच्चारण करते हुए पुष्प अर्पित करें।
इसे भी पढ़ें
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
जपतां कवचं नित्यं सर्वसौभाग्यपूरितम्। इति श्रीविष्णुयामले उपरिभागे जामदग्न्यदिव्याञ्जनसिद्धिकल्पे श्रीभार्गवकवचं सम्पूर्णम्॥
ॐ वल्ली देवसेनासमेत श्री सुब्रह्मण्यस्वामिने नमः
वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ । निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा ॥
ॐ श्रीं ह्रीं ह्स्सौः हूँ फट् नील सरस्वत्यै स्वाहा।
ॐ कुलमार्गप्रदर्शिन्यै नमः
ॐ रुद्राय नमः