शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
माँ लक्ष्मी मंत्र
ॐ चिबुकं गोपनन्दिनी पातु।
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकाररक्षा कवच मंत्र;
स्वरूपगोपनन्दिनी
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
गोप-नंदिनी मेरी ठुड्डी की रक्षा करें।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
अंग: चिबुक (ठुड्डी) की रक्षा
विस्तृत लाभ
अंग: चिबुक (ठुड्डी) की रक्षा।
टिप्पणी
इस कवच के मंत्रों को न्यास (शरीर के अंगों को स्पर्श करते हुए) के रूप में जपा जाता है।
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ सह नाववतु। सह नौ भुनक्तु। सह वीर्यं करवावहै।
ॐ त्रिवर्गस्वर्गसाधनाय नमः
ॐ सर्वसुन्दराय नमः
ॐ वरेण्यायै नमः
ख्फ्रेँ ख्फ्रीँ चण्डे चण्डचामुण्डे ह्रीँ हूँ स्त्रीँ छ्रीँ विच्चे घोरे महामदोन्मनि क्लीँ ब्लूँ गुह्येश्वरि ॐ परानिर्वाणे ब्रह्मरूपिणि ॐ फ्रेँ फ्रेँ सिद्धिकरालि आप्यायिनि नवपञ्चचक्रनिलये घोराट्टराविणि कलासहस्रनिवासिनि खँ खँ खँ ह्सौँ फ्रेँ अवर्णेश्वरि प्रकृत्यपर शिवनिर्वाणदे ख्फ्रेँ स्वाहा॥
ॐ पुरुषाय नमः