शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
माँ लक्ष्मी मंत्र
ॐ दैत्यान्तकाय नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
दैत्यों (असुरों) का अंत करने वाले
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
आंतरिक और बाहरी शत्रुओं से पूर्ण सुरक्षा
विस्तृत लाभ
आंतरिक और बाहरी शत्रुओं से पूर्ण सुरक्षा 21
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अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
एकवेणी जपाकर्णपूरा नग्ना खरास्थिता। लम्बोष्ठी कर्णिकाकर्णी तैलाभ्यक्तशरीरिणी॥ वामपादोल्लसल्लोहलताकण्टकभूषणा। वर्धनमूर्धध्वजा कृष्णा कालरात्रिर्भयङ्करी॥
अशेषहावभावधीरहीरहारभूषिते प्रभूतशातकुम्भकुम्भकुम्भकुम्भसुस्तनि। प्रशस्तमन्दहास्यचूर्णपूर्णसौख्यसागरे कदा करिष्यसीह मां कृपाकटाक्षभाजनम्॥
ॐ यज्ञभोक्त्रे नमः
ॐ ऐं ह्रीं श्रीं संतान लक्ष्म्यै नमः।
ॐ ज्यां ह्रीं जय जय जगन्मातः ऐं वद वद वाग्वादिनि स्वाहा
ॐ कुलाचारायै नमः