शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
माँ लक्ष्मी मंत्र
ॐ धनागारं धनेश्वरी पातु।
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकाररक्षा कवच मंत्र;
स्वरूपधनेश्वरी (लक्ष्मी स्वरूपा)
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
धनेश्वरी मेरे धन के भंडार की रक्षा करें।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
अंग: धन-भंडार की रक्षा
विस्तृत लाभ
अंग: धन-भंडार की रक्षा।
टिप्पणी
इस कवच के मंत्रों को न्यास (शरीर के अंगों को स्पर्श करते हुए) के रूप में जपा जाता है।
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ॐ निरायाय नमः।
ॐ यो वै रामचन्द्रः स भगवान् ये अन्तश्चेतनात्मा तस्मै वै नमो नमः भूर्भुवः स्वः