शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
माँ लक्ष्मी मंत्र
ॐ दुर्गमगायै नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारनामावली मंत्र | जप समय: प्रातः या घोर संकट काल |
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
जो अगम्य स्थानों और पारलौकिक सत्ता तक सरलता से पहुँचने वाली हैं।
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अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
न च प्राणसंज्ञो न वै पंचवायुः... चिदानन्दरूपः शिवोऽहम् शिवोऽहम्॥
ऐं ह्रीं श्रीं क्रौं हौं ह्रूं क्षूं लाट भैरवाय क्षूं ह्रूं हौं क्रौं श्रीं ह्रीं ऐं नमः।
ॐ सर्ववर्णमय्यै नमः
ॐ ब्राह्मणप्रियाय नमः
ॐ तत्त्वरूपिणे नमः
तडित्सुवर्णचम्पकप्रदीप्तगौरविग्रहे मुखप्रभापरास्तकोटिशारदेन्दुमण्डले। विचित्रचित्रसञ्चरच्चकोरशावलोचने कदा करिष्यसीह मां कृपाकटाक्षभाजनम्॥