शुकदेवकृत नृसिंह रक्षा मंत्र
दुर्गेष्वटव्याजिमुखादिषु प्रभुः पायान्नृसिंहोऽसुरयूथपारिः। विमुञ्चतो यस्य महाट्टहासं दिशो विनेदुर्न्यपतंश्च गर्भाः॥
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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इस मंत्र का अर्थ
जिनके अट्टहास से दिशाएं गूंज उठीं और दैत्यों की पत्नियों के गर्भ गिर गए, वे दैत्य-शत्रु भगवान नरसिंह दुर्गम स्थानों और युद्ध में मेरी रक्षा करें।
इस मंत्र से क्या होगा?
वन, युद्धभूमि, और दुर्गम संकटों में प्राण-रक्षा
आकस्मिक दुर्घटनाओं से बचाव
विस्तृत लाभ
वन, युद्धभूमि, और दुर्गम संकटों में प्राण-रक्षा। आकस्मिक दुर्घटनाओं से बचाव।
जप काल
प्रातः स्नान के पश्चात या दुर्गम यात्रा पर निकलते समय।
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ मुक्तानां-परमा-गतये नमः
ॐ वेदमन्त्राभिषेचिताय नमः
ॐ नमस्ते रुद्र मन्यव उतोत इषवे नमः। नमस्ते अस्तु धन्वने बाहुभ्यामुत ते नमः॥
ॐ पूर्वां दिशं कृष्णरता पातु।
ॐ महामात्रे नमः
यः पुस्तकाक्षगुण दण्डकमण्डलु श्रीर्निर्वृत्यमान करभूषणमिन्दुवर्णम् । स्तम्बेरमानन चतुष्टय शोभमानं त्वां संस्मरे द्विजगणाधिपते धन्यः ॥