ब्रह्मणस्पति सूक्त
ॐ गणानां त्वा गणपतिं हवामहे कविं कवीनामुपमश्रवस्तमम् । ज्येष्ठराजं ब्रह्मणां ब्रह्मणस्पत आ नः शृण्वन्नूतिभिः सीद सादनम् ॥
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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इस मंत्र का अर्थ
हे देवों के देव, हम आपका आवाहन करते हैं। आप ज्ञानियों में श्रेष्ठ हैं, जिनकी कीर्ति अतुलनीय है। हे मंत्रों के स्वामी ब्रह्मणस्पति, हमारी प्रार्थना सुनकर हमारे यज्ञ स्थल में विराजमान हों।
इस मंत्र से क्या होगा?
ज्ञान, नेतृत्व क्षमता में वृद्धि और सभी प्रकार के अनुष्ठानों में निर्विघ्नता
विस्तृत लाभ
ज्ञान, नेतृत्व क्षमता में वृद्धि और सभी प्रकार के अनुष्ठानों में निर्विघ्नता।
जप काल
किसी भी शुभ कार्य, विद्यारंभ या वैदिक अनुष्ठान के आरंभ में।
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ वसवे नमः
ॐ योगिने नमः
ॐ ह्रः ॐ सौं ॐ वैं ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं श्रीजयजय चण्डिकायै नमः। ॐ स्वीं स्वीं विध्वंसय विध्वंसय ॐ प्लूं प्लूं प्लावय प्लावय... (अति विस्तृत तांत्रिक शृंखला)... ॐ चामुण्डायै विच्चे स्वाहा। मम सकल मनोरथं देहि देहि, सर्वोपद्रवं निवारय निवारय... भञ्जय भञ्जय ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं स्वाहा॥
ॐ पूतनाजीवितापहाराय नमः
ॐ आद्यायै नमः
ॐ पीतवस्त्राय नमः