ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
शास्त्रीय पौराणिक मंत्र

ऋणहर्ता गणेश मंत्र

ॐ गणेश ऋणं छिन्धि वरेण्यं हुं नमः फट् ॥

साधना मंडल

जप, संकल्प और उपासना संकेत

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प्रकारऋणमुक्ति मंत्र
स्वरूपऋणमोचक गणपति
अर्थ एवं भावार्थ

इस मंत्र का अर्थ

हे गणेश, मेरे उत्कृष्ट ऋणों (आर्थिक और कर्मिक बाधाओं) को बलपूर्वक काट दें।

लाभ एक दृष्टि में

इस मंत्र से क्या होगा?

01

भारी कर्ज, दरिद्रता से मुक्ति और आर्थिक समृद्धि

विस्तृत लाभ

भारी कर्ज, दरिद्रता से मुक्ति और आर्थिक समृद्धि।

जप काल

मंगलवार, संकष्टी चतुर्थी पर ऋण मुक्ति के संकल्प के साथ।

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