शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
माँ लक्ष्मी मंत्र
ॐ इन्द्रजित्प्रहितामोघब्रह्मास्त्रविनिवारकाय नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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स्वरूपब्रह्मास्त्र-सहनकर्ता
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
मेघनाद के ब्रह्मास्त्र का सम्मान कर उसे स्वेच्छा से सहन करने वाले को नमन।
जप काल
नित्य प्रातः काल, लाल आसन पर बैठकर रुद्राक्ष या लाल चंदन की माला से 108 नामों का क्रमशः उच्चारण करते हुए पुष्प अर्पित करें।
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ विशाखाय नमः
ॐ कदलीहोमसन्तुष्टायै नमः
ॐ सुधिये नमः
हस्तीन्द्राननमिन्दुचूडमरुणच्छायं त्रिनेत्रं रसात् आलिष्टं प्रियया सपद्मकरया स्वाङ्कस्थया सन्ततम् । बीजपूर गदेक्षु कार्मुकलसच्चक्राब्ज पाशोत्पल व्रीह्यग्रस्वविषाण रत्नकलशान् हस्तैर्वहन्तं भजे ॥
रुं ह्रीं रुरवे नमः।
ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं धान्य लक्ष्म्यै नमः।