षण्मुख कवचम्
इरचेवि हलयुम सेव्वाळ इयलपुडन काक्क वायकै
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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इस मंत्र का अर्थ
भगवान अपने वेल् (भाले) से मेरे दोनों कानों और मुख की स्वभाविक रूप से रक्षा करें।
इस मंत्र से क्या होगा?
मुख और कानों से संबंधित व्याधियों का शमन
विस्तृत लाभ
मुख और कानों से संबंधित व्याधियों का शमन।
जप काल
कवच के अंग-न्यास रूप में।
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ यो वै रामचन्द्रः स भगवान् ये नित्यानन्दस्वरूपः तस्मै वै नमो नमः भूर्भुवः स्वः
ॐ पार्थध्वजाग्रसंवासिने नमः
ॐ अघोररूपाय नमः।
देवीं सरस्वतीं सरस्वतीं देवीं देवीं सरस्वतीं वाजेभिर्वाजेभिस्सरस्वतीं देवीं देवीं सरस्वतीं वाजेभिः॥ सरस्वतीं वाजेभिर्वाजेभिस्सरस्वतीं सरस्वतीं वाजेभिर्वाजिनीवतीं वाजिनीवतीं वाजेभिस्सरस्वतीं सरस्वतीं वाजेभिर्वाजिनीवतीं॥ वाजेभिर्वाजिनीवतीं वाजिनीवतीं वाजेभिर्वाजेभिर्वाजिनीवतीं। वाजिनीवतीति वाजिनी-वती॥
जो दुष्टों के दमन हेतु भयंकर परशु (फरसा) धारण करते हैं, उन्हें नमस्कार। (लाभ: शत्रुओं से रक्षा) 19।
ॐ गोविन्दाय नमः