माँ लक्ष्मी मंत्र
ॐ कपालरूपमात्रगायै नमः
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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इस मंत्र का अर्थ
संपूर्ण ब्रह्मांड को एक कपाल (नश्वरता) के रूप में देखने वाली।
जप काल
देवी की मूर्ति, यंत्र या चित्र के सम्मुख 'ककारादि सहस्रार्चन' विधि द्वारा।
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
लम्बोदरं श्यामं तनुं गणेशं कुठारमक्षस्रजं ऊर्ध्वगाभ्याम् । सालद्रुङ्गं दन्तमधः कराभ्यां वामेतराभ्यां च दधानमीडे ॥
जो अदम्य साहस वाले परम वीर हैं, उन्हें नमस्कार। (लाभ: साहस और निर्भयता) 19।
ॐ बलिने नमः
ॐ दुर्गमार्गप्रदायै नमः
ॐ खट्वाङ्गिने नमः
ॐ ह्रां ह्रीं ॐ नमो भगवते महा-वीर-वीराय सर्वदुःख निवारणाय ग्रहमण्डल सर्वभूतमण्डल सर्व-पिशाच-मण्डलोच्चाटन भूत-ज्वर एकाहिक-ज्वर द्वयाहिक-ज्वर त्र्याहिक-ज्वर चातुर्थिक-ज्वर संताप-ज्वर विषम-ज्वर ताप-ज्वर माहेश्वर-वैष्णव-ज्वरान् छिन्दि-छिन्दि यक्ष ब्रह्मराक्षस भूत-प्रेत-पिशाचान् उच्चाटय-उच्चाटय स्वाहा।