माँ लक्ष्मी मंत्र
ॐ कारणार्णवसम्मग्नायै नमः
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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इस मंत्र का अर्थ
कारण-रूप (शराब या परब्रह्म) के महासागर में निमग्न रहने वाली।
इस मंत्र से क्या होगा?
परब्रह्म रूपी महासागर में चेतना का विलीन होना
विस्तृत लाभ
परब्रह्म रूपी महासागर में चेतना का विलीन होना।
जप काल
नित्य उपासना, शिवरात्रि या अमावस्या की मध्यरात्रि में रुद्राक्ष या मुण्ड माला से जप।
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ नमो आदेश गुरु को, सोने का कड़ा, तांबे का कड़ा, हनुमान वनगरेया सजे मोंढे आन खड़ा। शब्द सांचा पिंड काचा, फुरो मंत्र ईश्वरो वाचा।
पूर्वे असितांग भैरवाय नमः पूर्वे मां रक्ष रक्ष काल कंटकान् भक्ष भक्ष आवाहयाम्यहं इत्र तिष्ठ तिष्ठ हुं फट् स्वाहा।
ॐ वीरभद्राय नमः
तेन स तत्क्षणादेव तुष्टा दत्ते महावरम्। येन पश्यति नेत्राभ्यां तत्प्रियं श्यामसुन्दरम्॥
ॐ अक्षयफलप्रदाय नमः
करस्थ कदली चूत पनसेक्षुक मोदकम्। बालसूर्य प्रभाकारं वन्देऽहं बालगाणपतिम्॥