शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
माँ लक्ष्मी मंत्र
ॐ कोटिसूर्यसमप्रभाय नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारनाम-जप मन्त्र; ये मन्त्र वासुदेव, बाल-गोपाल, और द्वारकाधीश स्वरूपों का पूर्ण प्रतिनिधित्व करते हैं।
स्वरूपविराट पुरुष
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
करोड़ों सूर्यों के समान कान्ति वाले को नमस्कार।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
अवसाद एवं अंधकार नाश
विस्तृत लाभ
अवसाद एवं अंधकार नाश
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ श्रीमती नेत्रयुगलं पातु।
समागच्छ महालक्ष्मि! धन्यधान्यसमन्विते! प्रसीद पुरतः स्थित्वा प्रणतं मां विलोकय॥
विश्वेश्वरि त्वं परिपासि विश्वं विश्वात्मिका धारयसीति विश्वम्। विश्वेशवन्द्या भवती भवन्ति विश्वाश्रया ये त्वयि भक्तिनम्राः॥ 18
ॐ सीतारामपादुकासेवायै नमः
ॐ जामदग्न्याय विद्महे महावीराय धीमहि तन्नो परशुरामः प्रचोदयात्।
ॐ चुं चण्डीश्वराय तेजस्याय चुं ॐ फट्