शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
माँ लक्ष्मी मंत्र
ॐ नवव्याकृतपण्डिताय नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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स्वरूपव्याकरण-ज्ञाता
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
नौ प्रकार के व्याकरणों के प्रकांड विद्वान (सूर्य के शिष्य) भगवान को नमन।
जप काल
नित्य प्रातः काल, लाल आसन पर बैठकर रुद्राक्ष या लाल चंदन की माला से 108 नामों का क्रमशः उच्चारण करते हुए पुष्प अर्पित करें।
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ ऐं क्लीं सौः बाले ब्राह्मि ब्रह्मपत्नि ऐं वद वद वाग्वादिनि स्वाहा
पक्वचूत फलकल्प मञ्जरीमिक्षुदण्ड तिलमोदकैः सह । उद्वहन् परशु हस्त ते नमः श्रीसमृद्धिपतये देव पिङ्गल ॥
ॐ पूष्णे नमः
ॐ यो वै रामचन्द्रः स भगवान् ये अष्टदिक्पालाः तस्मै वै नमो नमः भूर्भुवः स्वः
खों खं खं फट् प्राण-ग्रासी प्राण-ग्रासी हुं फट् सर्वशत्रुसंहारणां शरभशालुवाय पक्षिराजाय हुं फट् स्वाहा।
ॐ महात्मने नमः