शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
माँ लक्ष्मी मंत्र
ॐ प्रतापवते नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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स्वरूपप्रतापी
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
अत्यंत प्रतापी, तेजस्वी और सूर्य के समान आभा वाले को नमन।
जप काल
नित्य प्रातः काल, लाल आसन पर बैठकर रुद्राक्ष या लाल चंदन की माला से 108 नामों का क्रमशः उच्चारण करते हुए पुष्प अर्पित करें।
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
नमो गुहाय भूतानां गुहासु निहिताय च । अणोरणीयसे तुभ्यं महतोऽपि महीयसे ॥
ॐ शूराय नमः
हस्तीन्द्राननमिन्दुचूडमरुणच्छायं त्रिनेत्रं रसात् आलिष्टं प्रियया सपद्मकरया स्वाङ्कस्थया सन्ततम् । बीजपूर गदेक्षु कार्मुकलसच्चक्राब्ज पाशोत्पल व्रीह्यग्रस्वविषाण रत्नकलशान् हस्तैर्वहन्तं भजे ॥
मनसः काममाकूतिं वाचः सत्यमशीमहि। पशूनां रूपमन्नस्य मयि श्रीः श्रयतां यशः॥
ॐ गिरिप्रियाय नमः
गोपीजनवल्लभाय स्वाहा