शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
माँ लक्ष्मी मंत्र
ॐ सिन्धुसागरसङ्गमाय नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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स्वरूपविशाल स्वरूप
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
नदियों और सागर के संगम-स्वरूप विशाल भगवान को नमस्कार।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
हृदय की विशालता हेतु
विस्तृत लाभ
हृदय की विशालता हेतु
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
धृत पाशाङ्कुश कल्पलता स्वरदश्च बीजपूरयुतः । शशिशकल कलितमौली त्रिलोचनोऽरुणश्च गजवदनः ॥ भासुरभूषण दीप्तो बृहदुदर पद्म विष्टरोल्लसितः । विघ्नपयोधरपवनः करधृत कमलः सदास्तु भूत्यै ॥
वीरभद्राय अतिक्रूराय रुद्रकोप सम्भवाय सर्वदुष्ट निवर्हणाय हुं फट् स्वाहा।
ॐ जितामित्राय नमः
ॐ शङ्कुकर्णमहाकर्णप्रमुखाद्यभिवन्दिताय नमः
ॐ फाल्गुनसखाय नमः
पञ्चमं स्कन्दमातेति षष्ठं कात्यायनीति च। सप्तमं कालरात्रीति महागौरीति चाष्टमम्॥ नवमं सिद्धिदात्री च नवदुर्गाः प्रकीर्तिताः।