शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
सर्वमंगला नित्या मंत्र
स्वौं (Svaum)
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारएकाक्षर नित्या मंत्र
स्वरूपसर्वमंगला (14वीं नित्या)
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
सर्व-मंगलमयी देवी को नमन।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
सर्व-कल्याण और शून्याकाश में विचरण (खेचरी) की सिद्धि
विस्तृत लाभ
सर्व-कल्याण और शून्याकाश में विचरण (खेचरी) की सिद्धि।
जप काल
मूलाधार से आज्ञा चक्र तक न्यास।
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ पार्वतीप्रियनन्दनाय नमः
हरि राम हरि राम, राम राम हरि हरि (Hari Ram Hari Ram, Rama Rama Hari Hari)
ॐ पुरुषाय नमः
ॐ भगवते नमः
या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता। या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना॥ या ब्रह्माच्युतशंकरप्रभृतिभिर्देवैः सदा पूजिता। सा मां पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा॥
ॐ ह्रीं भीषण भैरवाय सर्व शाप निवारणाय मम वशं कुरु कुरु स्वाहा।