शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
लिंग पुराण आधारित गायत्री
ॐ तत्पुरुषाय विद्महे वक्रतुण्डाय धीमहि । तन्नो दन्ती प्रचोदयात् ॥
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारगायत्री मंत्र
स्वरूपतत्पुरुष / वक्रतुण्ड
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
हम उस तत्पुरुष को जानते हैं, वक्रतुण्ड का ध्यान करते हैं। वे दन्ती हमारी बुद्धि को प्रेरित करें।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
पापों का क्षय और शिव-पार्वती की संयुक्त कृपा की प्राप्ति
विस्तृत लाभ
पापों का क्षय और शिव-पार्वती की संयुक्त कृपा की प्राप्ति।
जप काल
शिव मंदिरों में गणेश पूजन के समय।
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