उच्छिष्ट गणपति (भैरव) न्यास मंत्र
ॐ उच्छिष्टगणपति देवतायै नमो हृदि।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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इस मंत्र का अर्थ
मैं हृदय में उच्छिष्ट गणपति (भैरव स्वरूप) को नमन करता हूँ।
इस मंत्र से क्या होगा?
वामाचार तंत्र में ज्ञान व असीम सिद्धि प्राप्ति हेतु शरीर का शुद्धिकरण
विस्तृत लाभ
वामाचार तंत्र में ज्ञान व असीम सिद्धि प्राप्ति हेतु शरीर का शुद्धिकरण 24।
जप काल
साधना से पूर्व हृदय को स्पर्श करते हुए 24।
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ भगवते नमः
ॐ शरणत्राणतत्पराय नमः
ॐ वृषभानुसुतायै नमः
ॐ वासिष्ठादिमुनिश्रेष्ठवन्दिताय नमः
ॐ हनुमान पहलवान पहलवान, बरस बारह का जबान, हाथ में लड्डू मुख में पान, खेल खेल गढ़ लंका के चौगान, अंजनी का पूत, राम का दूत, छिन में कीलौ नौ खंड का भूत, जाग जाग हड़मान हुँकाला, ताती लोहा लंकाला, शीश जटा डग डेरू उमर गाजे, वज्र की कोठड़ी ब्रज का ताला, आगे अर्जुन पीछे भीम, चोर नार चंपे ने सींण, अजरा झरे भरया भरे, ई घट पिंड की रक्षा राजा रामचंद्र जी लक्ष्मण कुँवर हड़मान करें।
ॐ त्रयीमूर्त्यै नमः