ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
शास्त्रीय पौराणिक मंत्र

अघोर मंत्र (दक्षिण मुख)

अघोरेभ्योऽथ घोरेभ्यो अघोरघोरेतरेभ्यः। सर्वतः शर्वः सर्वेभ्यो नमस्ते रुद्र रूपेभ्यः॥

साधना मंडल

जप, संकल्प और उपासना संकेत

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प्रकारआगमिक / तांत्रिक सुरक्षा मंत्र
स्वरूपअघोर शिव / स्वच्छंद भैरव (अग्नि तत्त्व)
अर्थ एवं भावार्थ

इस मंत्र का अर्थ

हे शिव! आपके जो अघोर (शांत) रूप हैं, जो घोर (भयंकर) रूप हैं, और जो इन दोनों से परे हैं, उन सभी रुद्र रूपों को मेरा सर्वत्र नमन है 7।

लाभ एक दृष्टि में

इस मंत्र से क्या होगा?

01

घोर शक्तियों का शमन, भय मुक्ति, तांत्रिक बाधाओं से रक्षा, और मूलाधार चक्र की ऊर्जा का शोधन

विस्तृत लाभ

घोर शक्तियों का शमन, भय मुक्ति, तांत्रिक बाधाओं से रक्षा, और मूलाधार चक्र की ऊर्जा का शोधन 7।

जप काल

दक्षिण दिशा की ओर मुख करके 35।

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