ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
शास्त्रीय पौराणिक मंत्र

नृसिंह मंत्र

अनङ्गरङ्गमङ्गलप्रसङ्गभङ्गुरभ्रुवां सविभ्रमससम्भ्रमदृगन्तबाणपातनैः। निरन्तरं वशीकृतप्रतीतनन्दनन्दने कदा करिष्यसीह मां कृपाकटाक्षभाजनम्॥

साधना मंडल

जप, संकल्प और उपासना संकेत

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प्रकारकृपा-कटाक्ष/स्तोत्र मंत्र।
स्वरूपनन्दनन्दन-वशीकृत (कृष्ण को वश में करने वाली)
अर्थ एवं भावार्थ

इस मंत्र का अर्थ

अपने नेत्र रूपी बाणों से नन्दनन्दन (श्रीकृष्ण) को निरंतर वश में करने वाली हे राधे, मेरी ओर कृपादृष्टि कब डालेंगी?

लाभ एक दृष्टि में

इस मंत्र से क्या होगा?

01

लाभ: कृष्ण-आकर्षण

विस्तृत लाभ

लाभ: कृष्ण-आकर्षण।

टिप्पणी

यहाँ इस सिद्ध स्तोत्र के सभी 19 श्लोकों को मंत्र रूप में, उनके अर्थ और लाभ सहित प्रस्तुत किया गया है। सभी का

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