ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
शास्त्रीय पौराणिक मंत्र

नृसिंह मंत्र

अश्वपूर्वां रथमध्यां हस्तिनादप्रबोधिनीम्। श्रियं देवीमुपह्वये श्रीर्मा देवीर्जुषताम्॥

साधना मंडल

जप, संकल्प और उपासना संकेत

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प्रकारराज-ऐश्वर्य मंत्र
स्वरूपगजलक्ष्मी
अर्थ एवं भावार्थ

इस मंत्र का अर्थ

जिनके आगे अश्व और मध्य में रथ हैं, जो हाथियों की ध्वनि से प्रबुद्ध होती हैं, उन देवी श्री को मैं बुलाता हूँ।

लाभ एक दृष्टि में

इस मंत्र से क्या होगा?

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राजसत्ता, नेतृत्व क्षमता

विस्तृत लाभ

राजसत्ता, नेतृत्व क्षमता।

जप काल

राजसी अनुष्ठान/हवन।

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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र

पाँचों त्रिशेम चलें, लांगुरिया सलार चलें। भीम की गदा चले, हनुमान की हाँक चले। नाहर की धाक चलै, नहीं चलै, तो हजरत सुलेमान के तखत की दुहाई है। एक लाख अस्सी हजार पीर व पैगम्बरों की दुहाई है। चलो मन्त्र, ईश्वर वाचा। गुरु का शब्द साँचा।

ॐ श्रीं ह्रीं ब्राह्म्यै स्वाहेति दन्तपङ्क्तीः सदाऽवतु। (स्वरूप: ब्राह्मी | लाभ: दाँतों और स्पष्ट वाचन-स्थान की रक्षा | अर्थ: ब्राह्मी देवी मेरी दंत-पंक्तियों की सदा रक्षा करें) 8

ॐ कमलासनसन्तुष्टायै नमः

ॐ शुद्धाय नमः।

ॐ गोलोकधामिन्यै राधायै नमः

पाशाङ्कुशापूप कपित्थजम्बू फलं तिलान् वेणुमपि स्वहस्तैः । धृतः सदासौ तरुणः अरुणाभः पायात्सयुष्मान् तरुणो गणेशः ॥

मंत्र | Pauranik