शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
नृसिंह मंत्र
ॐ अवनीधारिण्यै देव्यै नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
जप काउंटर लोड हो रहा है...
प्रकारसहस्रनाम जप मंत्र;
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
जो पृथ्वी (अवनी) को धारण करने वाली देवी हैं।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
भूमि और संपत्ति का लाभ
विस्तृत लाभ
भूमि और संपत्ति का लाभ।
जप काल
तुलसी या कमलगट्टे की माला पर जप;
इसे भी पढ़ें
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ पिङ्गललोचनाय नमः।
राजमातां राजलक्ष्मीं राजेष्टफलदायिनीम्। प्रत्यङ्गिरां नमस्यामि सिद्धिलक्ष्मीजयप्रदां॥
दोर्भिर्युक्ता चतुर्भिः स्फटिकमणिनिभैरक्षमालान्दधाना। हस्तेनैकेन पद्मं सितमपि च शुकं पुस्तकं चापरेण॥ भासा कुन्देन्दुशङ्खस्फटिकमणिनिभा भासमानाऽसमाना। सा मे वाग्देवतेयं निवसतु वदने सर्वदा सुप्रसन्ना॥
ॐ भार्गवाय नमः
अभयवरदहस्तः पाशदन्ताक्षमाला सृणिपरशुदधानो मुद्गरं मोदकं च । फलमधिगत सिंहः पञ्चमातङ्गवक्त्रो गणपतिरतिगौरः पातु हेरम्बनामः ॥
ॐ पुरुषाय नमः